मंत्र जाप एवं ध्यान
"मननात् त्रायते इति मन्त्रः" — जो मन का त्राण (कल्याण व मुक्ति) करे, वही मंत्र है।
महामृत्युंजय मंत्र
Maha Mrityunjaya Mantra
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
गायत्री महामंत्र
Maha Gayatri Mantra
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
श्री राम तारक मंत्र
Shri Ram Taraka Mantra
श्री राम जय राम जय जय राम।
शिव पंचाक्षरी मंत्र
Shiva Panchakshari Mantra
ॐ नमः शिवाय॥
हरे कृष्ण महामंत्र
Maha Mantra (Hare Krishna)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
गणेश मूल मंत्र
Ganesha Mool Mantra
ॐ गं गणपतये नमः॥
हनुमान मूल मंत्र
Hanuman Beej & Moola Mantra
ॐ हं हनुमते नमः॥
माँ दुर्गा नवार्ण मंत्र
Maa Durga Navarna Mantra
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
📿108 मनकों का आध्यात्मिक रहस्य (Why 108 Beads?)
सूर्य से पृथ्वी की दूरी सूर्य के व्यास का 108 गुना है। 108 जप ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ता है।
हृदय चक्र (अनाहत) से 108 प्रमुख ऊर्जा नाड़ियां निकलती हैं। जप से यह नाड़ियां जाग्रत होकर शांति देती हैं।
27 नक्षत्र और प्रत्येक के 4 चरण (27 × 4 = 108 चरण)। 108 जप से समस्त नवग्रह व नक्षत्र शांत होते हैं।